दिल्ली हिन्दुस्तान की धड़कन, हुस्न-ए-ग़ज़ल सी सुन्दर

दिल्ली हिन्दुस्तान की धड़कन, हुस्न-ए-ग़ज़ल सी सुन्दर
कला और साहित्य का अद्भुत, संगम जिसके तट पर

 

इन्द्रप्रस्थ सी सुन्दर इसकी, रोचक बड़ी कहानी
पांडव से अंग्रेज़ों तक की, बनी रही ये रानी
इसे सँवारा सबने; सबकी रही ये दुल्हन बन कर
कला और साहित्य का अद्भुत, संगम जिसके तट पर

 

अरावली का ताज शीष पर, यमुना मांग सँवारे
इसके तट पर मन्दिर, मस्ज़िद, गिरिजाघर, गुरुद्वारे
सबका मजहब प्यार-मुहब्बत, अल्ला हो या ईश्वर
कला और साहित्य का अद्भुत, संगम जिसके तट पर

 

बापू, नेहरू, इंदिरा जी के, सपनों की ताबीर है दिल्ली
अमर शहीदों की क़ुरबानी, की सच्ची जागीर है दिल्ली
प्रजातन्त्र का तीरथ दिल्ली, हर तीरथ से बढ़ कर
कला और साहित्य का अद्भुत, संगम जिसके तट पर