कौन सुनता है यहाँ चुप भी रहो

कौन सुनता है यहाँ चुप भी रहो
काट डालेंगे ज़ुबां चुप भी रहो

 

रहनुमाओं की यहाँ पर भीड़ है
लूट लेंगे कारवां चुप भी रहो

 

इस शहर पर प्रेत मंडराने लगे
बंद कर दो खिड़कियाँ चुप भी रहो

 

हैं बहुत हैरान बच्चे आजकल
टोकती रहती है माँ चुप भी रहो

 

अब कहाँ हैं अहले-फ़न समझेंगे जो
शेर की बारीक़ियाँ, चुप भी रहो

 

मुख़बरी करने लगी है अब ‘समर’
आपकी अपनी ज़ुबां चुप भी रहो