आँसुओं को छुपाना होता है

आँसुओं को छुपाना होता है
जब कभी मुस्कुराना होता है

 

हर नये ग़म को ये हिदायत है
मेरे घर हो के जाना होता है

 

साफ़ रह्ने के वास्ते मन को
आँसुओं से नहाना होता है

 

ख़ुद-ब-ख़ुद ज़ख़्म हँसने लगते हैं
जब भी मौसम सुहाना होता है

 

रात जागे है क्योंकि रोज़ इसे
एक सूरज उगाना होता है